Viram Chinh – विराम चिह्न उदाहरण और उनका प्रयोग

विराम चिह्न viram chinh (Punctuation Marks)

बोलते समय हम बीच -बीच में कुछ देर के रुकते हैं जिससे अर्थ में स्पष्टता आती है। इससे भावों को समझने में आसानी होती हैं। इस रुकने को विराम कहते हैं। लिखते समय इन्ही भावो को प्रकट करने के लिए हम कुछ चिह्न लगते है। ये चिह्न विराम चिह्न  (viram chinh )कहलाते हैं। 

फिर से समझना:-

जब हम बातचीत करते हैं तो अपनी बात ठीक ढंग से समझने या कहने के लिए बीच -बीच में रुकते हैं , इसे विराम कहते है। लिखते समय अपनी बात को सही ढंग से समझाने के लिए जहाँ रुकते हैं वहा कुछ चिह्न का प्रयोग करते हैं , उसे विराम चिह्न (viram chinh) कहते हैं। इस प्रकार –

पड़ते और लिखते समय वाक्य में रुकने के लिए लगाए गए चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं। 

हिंदी भाषा के प्रमुख विराम चिह्न (viram chinh) इस प्रकार हैं –

1. पूर्णविराम  चिह्न (।) (purn viram)

वाक्य के अंत में रुकने के लिए पूर्णविराम (purn viram) लगते हैं।

जैसे –

रोहित ने फल खाये।

2. प्रश्नवाचक चिह्न  (? )prashnavachak

प्रश्न पूछने के लिए इसका प्रयोग होता हैं।

जैसे –

क्या समीर फुटबॉल खेलता हैं ?

3. अल्पविराम  (,) alpviram

अल्प विराम (alpviram) का प्रयोग कम समय के लिए रुकने में इसका प्रयोग होता हैं।

जैसे –

राकेश, विजय और नीता विद्यालय नहीं जाएगे।

4 योजक चिह्न (-) yojak chinh

दो शब्दो को जोड़ने में इसका प्रयोग होता हैं।

जैसे-  

आज मेरे माता- पिता आएंगे।

5 निर्देशक चिह्न (―)(Nirdeshak Chinh)

किसी का कथन, संवाद बताने में इसका प्रयोग होता हैं।

जैसे-

सुमन ― राधा, तुम क्या कर रही हो?

6. उद्धरण चिह्न (” “) uddharan chinh

किसी का कथन बताने के लिए इसका प्रयोग होता हैं।

जैसे –

नेता जी ने कहा, “तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूँगा “

7. विस्मयादिबोधक चिह्न (!)vismayaadibodhak chinh

विस्मयादि बोधक चिन्ह का प्रयोग हर्ष, शोक, घिर्णा, आश्चर्य आदि का भाव प्रकट करने के लिए इसका प्रयोग होता हैं।

जैसे –

वाह! कितना सुहावना दृश्य हैं।

8. अर्ध-बृहदान्त्र चिह्न (;)ardh-brhadaantr chinh (Semi-Colon marks)

एक अर्धविराम (;) का उपयोग दो स्वतंत्र खंडों को अलग करने के लिए किया जाता है, जबकि यह प्रदर्शित करता है कि उनके बीच घनिष्ठ संबंध मौजूद है।

जैसे –

पिछली गर्मियों में हमने लंदन, इंग्लैंड की यात्रा की; पेरिस, फ्रांस; रोम, इटली; और एथेंस, ग्रीस।

9. कोष्टक चिह्न ( ) { } [ ] koshthak chinh (Brackets marks)

कोष्ठक ऐसे प्रतीक हैं जिनका उपयोग हम “अतिरिक्त जानकारी” या ऐसी जानकारी रखने के लिए करते हैं जो मुख्य सामग्री का हिस्सा नहीं है। कोष्ठक हमेशा जोड़े में आते हैं—अतिरिक्त जानकारी से पहले एक “खोलना ” कोष्ठक, और उसके बाद एक “समापन” कोष्ठक। कोष्ठक के दो मुख्य प्रकार हैं: गोल () और वर्ग []।

जैसे –

उन्होंने अपनी नई किताब में अपनी एक पुरानी किताब (द बिग बुक [1976]) का जिक्र किया।

मेरी कार ड्राइव में है (खुली खिड़की के साथ)।

10. तिरछा निशान (/)स्लैश तिरछा चिह्न slash oblique mark

स्लैश या तिरछा का उपयोग अक्सर अनन्य या समावेशी या, विभाजन और अंशों का प्रतिनिधित्व (Representation) करने के लिए किया जाता है।

जैसे –

1/3 = एक तिहाई

80 मील/घंटा = 80 मील प्रति घंटा

विराम चिह्न

हम लोग अब पहचान चुके है ये दस तरह के विराम चिह्न

विराम चिह्न

विराम चिह्न के  प्रयोग का सारांश

विराम चिह्न विचार की अभिव्यक्ति को नियंत्रित करता है; यह प्रवचन के घटकों के बीच वाक्यात्मक संबंधों (Syntactic relations) (अर्थात उनका सही संबंध) को एक दृश्य तरीके से रेखांकित करता है, बाद वाले को अधिक या कम महत्व की तार्किक इकाइयों के पदानुक्रम में व्यवस्थित करता है; बोले गए भाषण की गतिशीलता को लिखित भाषा में अनुवाद करता है (उदाहरण के लिए, उन लेखकों के लिए होता है जो संवादों को अधिक सत्यता देने की कोशिश करते हैं)। पाठ के लेखक के अनुसार विराम चिह्न अपने रूपों में भिन्न हो सकते हैं और एक शैलीगत तत्व का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं; हालाँकि, उपयोग और उसके बाद की परंपराओं के आधार पर, मानदंड और स्थिरांक स्थापित किए जा सकते हैं। इसलिए, विराम चिह्नों के उपयोग में एकरूपता ने एक “तार्किक” विराम चिह्न की पहचान करना संभव बना दिया।

Viram Chinh Infographic

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